पतंग की डोर से घायल होने वाले पक्षियों के लिए ऐप, हेल्पलाइन नंबर, उपचार केन्द्र, डॉक्टर, स्वयंसेवक और हजारों पशु-प्रेमी तत्पर

गांधीनगर, 13 जनवरी 2025 : उत्सवों को उमंग के साथ मनाने के लिए प्रसिद्ध गुजरात पशु-पक्षियों सहित सभी जीवों के प्रति गहरी संवेदना रखता है। इसका उदाहरण हर साल 14 और 15 जनवरी को मकर संक्रांति-उत्तरायण पर्व के दौरान पतंग उत्सव में घायल होने वाले पक्षियों के उपचार के लिए की जाने वाली व्यापक व्यवस्था से देखा जा सकता है।

हर साल की तरह, इस बार भी गुजरात में पतंग उत्सव के दौरान डोर से घायल पक्षियों के लिए ऐप, हेल्पलाइन नंबर, उपचार केन्द्र, डॉक्टर, स्वयंसेवक और हजारों पशु प्रेमी तत्पर हैं। हालांकि, विधिवत रूप से भले ही पतंग उत्सव 14-15 जनवरी को मनाया जाता हो, लेकिन पतंग प्रेमी गुजरातियों का उत्साह जनवरी की शुरुआत से ही शुरू हो जाता है। इसीलिए, घायल पक्षियों की रक्षा के लिए करुणा अभियान 10 जनवरी से ही शुरू कर दिया जाता है।

इस वर्ष भी 10 जनवरी से 20 जनवरी 2025 तक उत्तरायण पर्व के दौरान पतंग की डोर से पक्षियों को घायल होने से बचाने और घायल पक्षियों के उपचार के लिए राज्यव्यापी करुणा अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने अभियान के तहत अहमदाबाद शहर के बोडकदेव क्षेत्र में स्थित वाइल्डलाइफ केयर सेंटर का सोमवार को दौरा किया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान वाइल्डलाइफ केयर सेंटर द्वारा की जा रही विभिन्न गतिविधियों का निरीक्षण किया और वन्यजीवों की फोटोग्राफी प्रदर्शनी का भी दौरा किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 'स्नेक रेस्क्यू ऐप' लॉन्च की। साथ ही उन्होंने वन विभाग द्वारा तैयार की गई ‘करुणा अभियान’ पुस्तक का विमोचन किया और 'करुणा अभियान 2025 सिग्नेचर' कैंपेन में भी हिस्सा लिया।

राज्य के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक और हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स डॉ. ए. पी. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तरायण पर्व के दौरान घायल पक्षियों को बचाने के लिए यह अनूठा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में अब तक हजारों घायल पक्षियों की जान बचाई जा चुकी है। 10 जनवरी से 20 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान को सफल बनाने के लिए पशुपालन विभाग, वन विभाग, महानगर पालिकाओं-नगर पालिकाओं और विभिन्न स्वैच्छिक संस्थाओं ने सहयोग दिया है।

उत्तरायण पर्व के दौरान पतंग की डोर से किसी निर्दोष पक्षी या पशु को चोट न पहुंचे, इसके लिए राज्यव्यापी करुणा अभियान के तहत वन विभाग ने व्हाट्सएप नंबर 8320002000 और 1926 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इन नंबरों पर "Hi" संदेश भेजने पर एक लिंक प्राप्त होगी, जिस पर क्लिक करने से जिलेवार उपलब्ध सभी पक्षी उपचार केंद्रों की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा, पशुपालन विभाग ने 1962 नंबर भी जारी किया है, जिससे संपर्क कर नागरिक निर्दोष पशु-पक्षियों की जान बचा सकते हैं।

करुणा अभियान 2025 में लगभग 600 से अधिक वेटरनरी डॉक्टर और 8,000 से अधिक सेवाभावी स्वयंसेवक सेवा में जुटे हुए हैं। साथ ही, पशुपालन विभाग, वन विभाग और विभिन्न स्वैच्छिक संस्थाओं के सहयोग से राज्यभर में कुल 1,000 से अधिक उपचार केन्द्र स्थापित किए गए हैं।इस अभियान के दौरान राज्यभर के 865 पशु अस्पताल, 34 वेटरनरी पॉलीक्लिनिक, 27 शाखा पशु अस्पताल, 587 मोबाइल पशु अस्पताल और 37 करुणा एनिमल एंबुलेंस छुट्टियों के दिन भी कार्यरत रहेंगे। यहां घायल पशु-पक्षियों के उपचार के लिए सभी आवश्यक उपकरण और दवाओं का स्टॉक सुनिश्चित किया गया है।

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस करुणामय पहल के परिणामस्वरूप कई निर्दोष पशु-पक्षियों को नया जीवन मिला है। पिछले आठ वर्षों में करुणा अभियान के तहत राज्यभर में 97,200 से अधिक पशु-पक्षियों को बचाया गया है, जिनमें से 31,400 से अधिक पशुओं और 65,700 से अधिक पक्षियों का उपचार किया गया है।

उत्तरायण जैसे त्योहारों और लोक उत्सवों के दौरान निर्दोष जीवों की चिंता कर उनके उपचार और देखभाल का यह करुणा अभियान गुजरात की एक अनूठी पहल बन चुका है। पिछले वर्ष करुणा अभियान के तहत राज्यभर में 13,800 से अधिक पशु-पक्षियों को बचाया गया था, जिनमें 4,400 से अधिक पशु और 9,300 से अधिक पक्षी शामिल थे।

पिछले आठ वर्षों में सबसे अधिक अहमदाबाद जिले में लगभग 17,600, सूरत जिले में 13,300, वडोदरा जिले में 10,700, राजकोट जिले में 8,300, आणंद जिले में 6,800 और जूनागढ़ जिले में 6,100 से अधिक पशु-पक्षियों को बचाकर उनका उपचार किया गया है। इस प्रकार, गुजरात द्वारा शुरू किया गया ‘करुणा अभियान’ का आदर्श मॉडल आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन गया है।

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